हिंदी क्रियाओं की कुछ विशेषताएँ · वृषभ प्रसाद जैन हर भाषा की संरचनाओं की कुछ-न-कुछ विशेषता होती जरूर है, यह विलक्षणता या विशेषता ही उस भाषा को अपनी पृथक् पहचान देती है, इस आलेख में हम हिंदी के समकालीन प्रयोग की क्रियाओं की कुछ विशेषताओं की चर्चा करेंगे । इस आलेख का प्रारम्भ वर्षों पहले समकालीन हिंदी व्याकरण परियोजना जो महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में हमने प्रारम्भ की थी, जिसे बाद के प्रशासन ने अज्ञात कारणों से आगे न चलाया, क्रिया को लेकर डॉक्टर श्रीरमण मिश्र जी और डॉक्टर अनिल कुमार पाण्डेय जी के साथ कुछ काम किया था, मैं इन दोनों गंभीर विद्वानों और विश्वविद्यालय का बहुत आभारी हूँ कि उसने इस तरह नये ढंग से हिंदी की मौलिक प्रकृति को समझने का मुझे अवसर दिया था, स्मरण के आधार पर उस विचार चर्चा के कुछ अंशों पर मैं यहाँ प्रस्तुति कर रहा हूँ, ताकि विचार जीवित रहे और श्रम निरर्थक न जाए और चाहें तो, अगली पीढी के लोग इसे आगे बढ़ाए ँ । वैसे इस व्याकरण-विचार-यात्रा में कुछ अन्य मित्र भी शामिल रहे, जिनमें क...
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